अंशरोपण करें ताकि यादें सजीव रहे।
कदम संस्था के बीजारोपण सहप्रभारी कदम मित्र अनुभव मातेले की बड़ी मां स्व. श्रीमती सरला मातेले जी का अंशरोपण गुरुवार 17 सितम्बर 2026 को परिजनो एवं कदम मित्रों की उपस्थिति में उनके निज निवास विजयनगर, जबलपुर में संपन्न हुआ।
जिन समाजो में दाह संस्कार होता हैं उस समाज के व्यक्ति दाह संस्कार के बाद दिवंगत व्यक्ति की मुठ्ठी भर पवित्र भस्म को लाकर 10 वें या 13 वें दिन परिजन उसे गमले में खाद मिट्टी के साथ मिला कर उसमे एक दो बीज रोप देते हैं 15-20 दिन बाद जब पौधा अंकुरित होता तब परिवार के सदस्य यह महसूस करते है कि वह दिवगंत व्यक्ति पौधे के रूप मे हमारे साथ रहने वाला हैं। भावनात्मक लगाव के साथ-साथ अंशरोपण का वैज्ञानिक पक्ष भी है जहां पवित्र भस्म मे कैल्शियम कार्बोनेट प्रचुर मात्रा में होता है जो कि अम्लीय मिट्टी के लिये वरदान है साथ ही इसमें पोटाश एवं फॉस्फेट पाया जाता है जो पौधो की ग्रोथ के लिये आवश्यक हैं अंशरोपण से कई हजारों परिवार पूरे देश में जुड़ चुके हैं।